नारी तेरा रूप है गंगा सा निराला
देख तुझे मे अर्पित करदु सुरभित पुष्पो की माला ,
तुम्हे श्रद्धा रूप मे "प्रसाद " ने स्वीकारा,
देवी मा सहचरी प्राण कह तुम्हे "पंत " ने है सराहा
तुम हो निर्मल रुपा ,पलती है जिसमे स्नेह सरिता,
प्रेम दया वात्सल्य की मूर्ति ,
देव करे स्वयं तेरी स्तुति ,
नारी से बनते नर नारी
फिर क्यु नर से है सदा नारी हारी।
उठो जागो आगेआओ ,
यहयुग है आधुनिक ,मैं देती तुम्हें एक सीख
सह अन्याय आसु सेतुम आँचल ना अपना भिगाओ ,अबलाखुद को मान भवानी का अस्तित्व ना मिटाओं
अपरीमित शाक्ति का पूँज तु
कैसे करू तेरा गुणगान
इतना अल्प ही गान कर
मैं देती अपने शब्दों को विराम.....।
Dedicate 4 all women☺ written by Barkha Bhatt
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