Monday, November 9, 2015

Poem by Barkha

मेरे दीमाग का फतुर नहीं ,
हर पल में बसता है वो 

जब भी मैंउदास रहूँ  ..
मेरे  मन मे हसता है वो ..
अक्स का उससे नाता नहीँ ,
मेरी रुह से अठखेलियाँ करता है वो..:

जब भी तन्हा बेठू मैं ,,
हौले से बाते करता है वो...
वो कोईं टूटा  ख्वाब नहीं,मेरी सासों में रहता है वो:..

जब भी जीने से मूहँ मोड लू ,छूप छूप के प्रेरणा देता है वो..
वो कोई बेमोल अल्फाज नहीं ,
भावनाओ के सागर में बहता है वो :..
जब भी कोई समा देखु
अश्क बनके मेरे लबों  पर उतरता है वों.:
वों कोईं मामुली इन्सान नहीं ,
मेरे ७गिवन की नैया है वो :. ,कभीदाेस्त तो कभी खुदा बनके मुझको पार ले |जाता है वो :.😊😘

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